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“मधुमेह आपके जीवन का अंत नहीं है
आयुर्वेद में मधुमेह (डायबिटीज) के उपचार के लिए विभिन्न प्राकृतिक उपाय और जीवनशैली सुधार शामिल हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण शरीर की प्रकृति (प्रकृति), दोषों (वात, पित्त, कफ), और व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति पर आधारित होता है। यहाँ आयुर्वेद में मधुमेह के उपचार के कुछ सामान्य उपाय दिए गए हैं
जामुन:
जामुन के बीज का चूर्ण मधुमेह में फायदेमंद होता है। इसे सुबह खाली पेट लें।
करेला:
करेले का रस या चूर्ण इंसुलिन उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है।
आंवला:
आंवला का रस पाचन को सुधारता है और शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।
गिलोय:
गिलोय का रस रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक है।
मेथी:
मेथी के बीज को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं।
योग और ध्यान:
प्राणायाम और योगासन जैसे मंडूकासन, वज्रासन, और पवनमुक्तासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
सामान्य सुझाव:
आयुर्वेद, जिसका अर्थ है “जीवन का विज्ञान,” भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है। यह विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसकी जड़ें 5000 वर्षों से अधिक पुरानी हैं।
त्रिदोष संतुलन के लिए:
- त्रिफला चूर्ण का सेवन रात में करें।
- नियमित रूप से योग और ध्यान करें।
- प्रकृति (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के अनुसार दिनचर्या अपनाएं।


पंचकर्म थेरेपी:
- वमन: शरीर से अतिरिक्त कफ को निकालने में मदद करता है।
- विरेचन: पाचन तंत्र को साफ करने के लिए उपयोगी।
- बस्ती: वात दोष को संतुलित करता है और शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।
“रसायन नहीं, प्रकृति की पहचान – आयुर्वेद है असली जान।”
HEALTH & WELLNESS COACH
ANURAG SHUKLA
CMS-ED AYURVEDIC PRACTICNER
FOUNDER
“जड़ों से जुड़े, आयुर्वेद से जुड़े।”
- प्रकृति के साथ समय बिताएं, जैसे पेड़ों के नीचे बैठना, नदियों के पास जाना, और खुली हवा में सांस लेना।
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